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  • 03 June, 2019

कम्युनिकेशन स्किल और एप्टिट्यूड में दिल्ली, अंग्रेजी में कर्नाटक और मार्केटिंग में महाराष्ट्र के युवा अव्वल

फुर्सत के पलों में रचित जैन।

भोपाल. रोजगार तलाश रहे युवाओं के मामले में दिल्ली के युवाओं की कम्युनिकेशन स्किल्स कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के युवाओं की तुलना में बेहतर है। जबकि मार्केटिंग में महाराष्ट्र के युवा बाकी राज्यों से बेहतर हैं। ये खुलासा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ‘यूथ4वर्क’ के सर्वे में हुआ है।

सर्वे छह शहरों के डेढ़ लाख से ज्यादा युवाओं के बीच किया गया। इन युवाओं ने करियर के चुनाव से पहले सॉफ्ट स्किल्स जैसे अंग्रेजी, कम्युनिकेशन और एप्टिट्यूड को महत्वपूर्ण माना है। देश में सॉफ्टेवयर डेवलपमेंट में कोर जावा दुनिया भर में सबसे ज्यादा डिमांड वाली स्किल है। इस मामले में यूपी के युवाओं की दिलचस्पी सबसे कम रही।

कम्युनिकेशन स्किल्स में दिल्ली अव्वल

महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा युवाओं ने अपनी कम्युनिकेशन स्किल्स पता लगाने के लिए टेस्ट दिया। जबकि ऐसे युवाओं की संख्या उत्तर प्रदेश में सबसे कम थी। लेकिन औसत आधार पर यूपी के युवाओं की कम्युनिकेशन स्किल तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के युवाओं की तुलना में बेहतर पाई गई।

एप्टिट्यूड में दिल्ली आगे

दबाव में संयमित व्यवहार, टाइम मैनेजमेंट और डिसीजन मेकिंग जैसे एप्टिट्यडू टेस्ट में दिल्ली के युवा सबसे बेहतर रहे। जबकि यूपी के युवाओं ने चौंकाते हुए तमिलनाडु, कर्नाटक को पछाड़ा।

मार्केटिंग में आंध्र पिछड़ा

मार्केटिंग स्किल्स में महाराष्ट्र के युवा अव्वल हैं। इसमें यूपी के युवा तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के युवाओं से आगे और चौथे नंबर पर हैं। दिल्ली दूसरे नंबर पर है। कर्नाटक तीसरे पायदान पर है।

इन पांच पैमानों पर हुआ सर्वे

यह सर्वे कम्युनिकेशन स्किल्स, अंग्रेजी भाषा पर पकड़, एप्टिट्यूड, कोर जावा की जानकारी और मार्केटिंग स्किल्स के आधार पर किया गया। इसके जरिए नौकरी के लिए योग्य टैलेंट की पहचान करने का लक्ष्य रखा गया।

रैंक राज्य

1 दिल्ली

2 महाराष्ट्र

3 कर्नाटक

4 उत्तर प्रदेश

5 तमिलनाडु

6 आंध्र प्रदेश

देश में रोजगार के लिए योग्य टैलेंट की उपलब्धता और नौकरी के प्रति युवाओं के रुझान को लेकर दैनिक भास्कर ने यूथ4वर्क के संस्थापक और सीईओ रचित जैन से फोन पर बातचीत की

टैलेंट के हिसाब से किस सेक्टर में ज्यादा मौके हैं?

-आज के ज्यादातर युवा एक-दूसरे को देखकर एमबीए, आईटी जैसे विकल्पों की तरफ ज्यादा झुकाव दिखाते हैं। जबकि इस दिशा में मानसिकता बदलने की जरूरत है। ऐसे कई क्षेत्र हैं, जहां इन दिनों स्किल्ड वर्कफोर्स की कमी है। यहां तक कि लेखन, गणित जैसे क्षेत्रों में भी इन दिनों ज्यादा डिमांड है।

छोटे शहरों में टैलेंट पूल कैसा है? वहां रोजगार योग्य युवाओं की क्या स्थिति है?

-नौकरी के लिए देश में सबसे ज्यादा योग्य टैलेंट छोटे शहरों में ही है। खास बात यह है कि यहां के युवा काम के प्रति बड़े शहरों के युवाओं की तुलना में ज्यादा समर्पित हैं। वे उन्हीं स्किल्स पर भरोसा जताते और दिखाते हैं, जिनमें वे वाकई कुशल हैं। जबकि कई बार बड़े शहरों में युवा प्रैक्टिकली वे काम नहीं कर पाते, जिसमें वे खुद को कुशल बताते हैं।

सर्वे के लिए सिर्फ 6 राज्य क्यों चुने?

-हमारे पैमानों के हिसाब से इन राज्यों के नतीजों में काफी चीजों में समानता पाई गई। हमारी टीम अलग-अलग पैमानों पर स्क्रूटनी करती है। पिछले 4 महीने में देशभर के 30 हजार से ज्यादा युवाओं का टेस्ट ले चुके हैं। इनमें बहुविकल्पीय सवालों को विभिन्न पैमानों पर 6 करोड़ बार से ज्यादा जवाब आ चुके हैं। इसके अलावा रोज करीब 5-6 हजार युवा स्किल टेस्ट दे रहे हैं।

स्किल डेवलपमेंट से युवाओं को नौकरी मिलने की क्या गारंटी है?

-नौकरी की संभावना तभी बनेगी, जब स्किल्ड लोगों की जानकारी कंपनियों तक पहुंचेगी। सरकार ने लोगों को स्किल्ड तो बनाया, लेकिन उनकी जानकारी उपलब्ध नहीं है। कंपनियों को कुशल कर्मचारियों की जरूरत है, लेकिन उन्हें पता ही नहीं चलता कि इन्हें कहां ढूंढना है।

क्या स्किल डेवलपमेंट पर सरकार को कोई सिफारिशें सौंपी है?

-हम नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के साथ काम कर रहे हैं। सरकारी स्तर पर कई तरह की मदद मिल रही है। लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि करियर के परंपरागत तरीकों से आगे सोचने की जरूरत है। थोड़ी मानसिकता बदलनी होगी।